नवोदय की जिंदगी
प्रणवी परजणे, 9 वीं ब
नवोदय की जिंदगी
- प्रणवी परजणे, 9 वीं ब
सुबह तो हुई कहकर
मॅम उठती है,
पहली व्हिसल बज गई
नानी याद आ जाती है।
पीटी से आये और सो गये
उठने का मन नहीं होता,
लगता है कभी ये शेडूल
रुक क्यों नहीं जाता।
नाश्ता करने के लिए नौ बजे
पुलाव खाकर सब खुश हो गए,
चटनी ली भर-भरकर
इतनी चटणी खाने से,
डॉट पडती घर पर।
दोपहर हुई, स्कूल छूटी,
खाना खा कर सो गए
नींद खुली, स्कूल की ओर भागे,
देखा तो सर क्लास में
पढ़ाने लगे।
बेल बजी
चेहरे का रंग उड गया
ग्राउंड पर आए तो खेलने
में डूब गए।
टाइम हो गया
इव्हिनिंग स्टडी का,
बॅग ले के चल पडे,
जितना पढना था उतना
पढ लिया
अब मेस में खाने पर
टूट पडे।
हाऊस पर आए, थोडी पढाई
के साथ मस्ती की
दस बजे लाईट बंद
हो गई,
फिर से वही रुटीन के लिए
हम शुरू हो गए।