ऐ मेरे वतन
वैदेही चव्हाण, 8 वीं ब
ऐ मेरे वतन
- वैदेही चव्हाण, 8 वीं ब
ऐ मेरे वतन, तेरे लिए ओढ़ लूँ कफ़न,
तुझसे जुदा मैं अधूरा, अंतरंग मन।
बिछा दो मुझ पर तिरंगा,
तू जान है मेरी,
तू शान है मेरी।
तुझ पर कुर्बान है ये ज़िंदगी,
ऐ मेरे वतन।
रोता है सारा जहाँ मेरे लिए,
जब मरता हूँ मैं,
मगर खुश होता हूँ तेरे लिए।
क्योंकि तुझे बचाता हूँ मैं,
मैं रक्षक नहीं,
तेरा बेटा हूँ मैं।
तेरे लिए कफ़न में लेटा हूँ,
ना दिन होता है, ना रात।
तेरे लिए तो मैं
बस एक मेहमान हूँ,
शान से जीना,
शान से मरना —
यही मेरी पहचान है।
जब तेरे नसीब में आना हो, ऐ वतन,
तेरे लिए जान भी कुर्बान।
दिल में हम रखते नहीं
कोई अरमान।