बेटी
वैदही चौहान, 8 वीं ब
Mar 29, 2026 - 10:52
Mar 30, 2026 - 09:13
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बेटी
- वैदही चौहान, 8 वीं ब
खुशियों में राजकुमारी
दुखों में घायल शेरनी
मेरी बेटी है महलों की रानी।
बचपन में उंगली पकड़कर चलनेवाली
आज खुद मेरी लाठी का सहारा बनी
वो है मेरी बेटी।
कभी अंधेरे से डरनेवाली
आज अंधेरे में अकेली चलनेवाली
मेरी प्यारी बेटी।
बचपन में खुद के लिए जीती
आज दूसरों के लिए जीना सीखाती
दु:ख आता तो संभल लेती सबको
ऊपर भरा लेती कोने में गम को
सूरज-सा तेज
चांद-सा मुखड़ा
बेटी बाप के दिल का टुकड़ा
मेरी बेटी ने मेरी जिंदगी बनाई
उसने मेरी दुनिया समाई।