लाचार जिंदगी
- आरती शेळके, 9 A
लाचार जिंदगी
- आरती शेळके, 9 वी अ
क्या है मेरी गलती, जो मैं एक लड़की हूँ?
ज़माना कहता है, मैं दिल से बहुत हल्की हूँ।
अगर मैंने की छोटी सी भी गलती,
सज़ा तो मुझे हरदम ही मिलती।
थोड़ा सा भी गुस्सा जो आ जाए,
कहर बरसाया जाता है हर बार।
पर कौन उन्हें समझाए,
उसका मन तो है शांति का संसार।
ये हमेशा लड़कियों के साथ ही क्यों होता है?
घर वालों के साथ
समाज के ताने भी सहने पड़ते हैं।
समाज ने बना दी ज़िंदगी ज़हर,
पर मन कहता है —
थोड़ा सा और ठहर।
कभी न कभी तो हम कर के दिखाएँगे,
इन सब लोगों के
सिर शर्म से झुक जाएँगे।
जब हम अपने पैरों पर खड़े रहेंगे,
यही ठुकराने वाले लोग
हमारे लिए तालियाँ बजा रहे होंगे।
इसलिए ज़िंदगी सिर्फ़ एक बार मिलती है,
ज़रा जी कर देखो।
हर गलती से, हर पल
कुछ न कुछ सीखो।