वीर
समृद्धी पवार, 11 वीं अ
वीर
- समृद्धी पवार, 11 वीं अ
वीर हो तुम, हमारी शान हो,
जान हो तुम, हमारा जहान हो।
साँस हो तुम, हमारी धड़कन हो,
मजबूत हो तुम, हमारी ताक़त हो,
ज़ुबान हो तुम, हमारी बात हो।
वीर जवान हैं तो हम हैं,
उनके बिना सारा जहाँ कम है।
वीरों जैसा किसी में ना दम है,
वीर को घर से बिछड़ने का ग़म है।
आज भी शहीद जवानों के लिए
आँखें नम हैं।
बॉर्डर पर आज भी लहरा रहा तिरंगा,
वीरों के होते शत्रु भी
नहीं लेते पंगा।
रात-दिन लड़ते रहते हैं,
चाहे धरती हो, सूरज हो या गंगा।
सीना ताने बॉर्डर पर खड़े हैं दिन-रात,
मिलता नहीं वक़्त
घर वालों से करने बात।
आप जैसा कोई नहीं,
आपके लिए हर हाथ सलामात।
ख़ुशी-ख़ुशी साँस छोड़ देती है
धरती माँ आपके साथ।
वीरों को मेरा प्रणाम,
शहीद जवानों को मेरा सलाम।